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مقدّمه |
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بـه نـام آن كـ ه جـان را فكرت آموخت
چــراغ دل بــه نــور جــان برافــروخت
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ز فضـلش هـر دو عـالم گشـت روشـن
ز فيضــش خــاك آدم گشــت گلشــن
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توانائـــي كـــه در يـــك طـــرفه العـــين
ز كـــاف و نـــون پديـــد آورد كونـــين
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چـــو قـــاف قـــدرتش دم بـــر قلـــم زد
هـــزاران نقـــش بـــر لـــوح عـــدم زد
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از آن دم گشـــت پـــيدا هـــر دو عـــالم
وز آن دم شــــد هــــويدا جــــان آدم
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٥ |
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در آدم شــد پديــد ايــن عقــل و تمييــز
كـه تـا دانسـت از آن اصـل همـه چيـز
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چـو خـود را ديـد يـك شـخص معـين
تفكـــر كـــرد تـــا خـــود چيســـتم مـــن
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ز جـزوي سـوي كلـي يـك سـفر كـرد
وز آنجــا بــاز بــر عــالم گــذر كــرد
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جهـــــان را ديـــــد امـــــر اعتـــــباري
چــو واحــد گشــته در اعــداد ســاري
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جهـان خلـق و امـر از يـك نفـس شـد
كـه هـم آن دم كـه آمـد بـاز پـس شـد
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١٠ |
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ولــي آن جايگــه آمــد شــدن نيســت
شـدن چـون بنگـري جـز آمـدن نيسـت
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بــه اصــل خــويش راجــع گشــت اشــيا
همــه يــك چيــز شــد پــنهان و پــيدا
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تعالَــي االله قديمــي كــو بــه يــك دم
كـــــند آغـــــاز و انجـــــام دو عـــــالم
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جهــان خلــق و امــر ايــنجا يكــي شــد
يكـــي بســـيار و بســـيار اندكـــي شـــد
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همـه از وهـم تـو است اين صورت غير
كـه نقطـة دايـره اسـت از سـرعت سـير
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١٥ |
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يكــي خــط اســت از اول تــا بــه آخــر
بـــر او خلـــق جهـــان گشـــته مســـافر
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در ايــــن ره انبــــيا چــــون ســــاربانند
دلـــــــيل و رهـــــــنماي كاروانـــــــند
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وز ايشـــان ســـيد مـــا گشـــته ســـالار
هــم او اول هــم او آخــر در ايــن كــار
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احـــد در مـــيمِ احمـــد گشـــت ظاهـــر
در ايـــن دور اول آمـــد عـــين آخـــر
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ز احمـد تـا احـد يـك مـيم فـرق است
جهانـي انـدر آن يـك مـيم غـرق است
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٢٠ |
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بـــر او خـــتم آمـــده پايـــان ايـــن راه
در او منـــزل شـــده «اُدعـــوا اِلَـــي االله»
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مقــام دلگشــايش جمــعِ جمــع اســت
جمــال جانفــزايش شــمع جمــع اســت
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شــده او پــيش و دلهــا جملــه از پــي
گــــرفته دســــت دلهــــا دامــــنِ وي
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در ايــن ره اولــيا بــاز از پــس و پــيش
نشـــاني دادهانـــد از منـــزل خـــويش
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بــه حــد خــويش چــون گشــتند واقــف
ســخن گفتــند در معــروف و عــارف
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٢٥ |
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يكـي از بحـرِ وحـدت گفـت انـا الحـق
يكـــي از قـــرب و بعـــد و ســـيرِ زورق
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يكـــي را علـــم ظاهـــر بـــود حاصـــل
نشـــــاني داد از خشـــــكئ ســـــاحل
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يكــي گوهــر بــرآورد و هــدف شــد
يكــي بگذاشــت آن نــزد صــدف شــد
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يكي در جزو و كل گفت اين سخن باز
يكــي كــرد از قــديم و مٌحــدَث آغــاز
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يكـي از زلـف و خـال و خـط بيان كرد
شـراب و شــمع و شـاهد را عــيان كــرد
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٣٠
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يكــي از هســتئ خــود گفــت و پــندار
يكــي مٌســتَغرَقِ بــت گشــت و زٌنـّــار
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ســخنها چــون بــه وِفــقِ منــزل افــتاد
در اَفهــــامِ خلايــــق مشــــكل افــــتاد
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كسـي را كانـدر ايـن معني است حيران
ضــــــرورت ميشــــــود دانســــــتنِ آن |
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