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سوءال |
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چـــــرا مخلـــــوق را گويـــــند واصـــــل
ســلوك و ســيراو چــون گشــت حاصــل؟ |
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جواب |
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وصــال
حــق ز خَلقِــيَت جدائــي اســت
ز
خــود بــيگانه گشــتن آشــنائي اســت
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چـــو ممكـــن گـــرد امكـــان
برفشـــانَد
بــه جــز واجــب دگــر
چيــزي نمانَــد
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٤٧٠ |
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وجـود هـر دو عـالم چـون خـيال اسـت
كــه در وقــت بقــا عــين زوال اســت
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نـه مخلـوق اسـت
آن كو گشت واصل
نگـــويد
ايـــن ســـخن را مـــرد كامـــل
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عــدم كــي راه يابــد انــدر ايــن بــاب
چــه نســبت خــاك را بــا رَبِّ
اربــاب
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عـدم چـه
بـُوَد كـه بـا حـق واصـل آيـد
وز او ســـير و ســـلوكي حاصـــل آيـــد
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تـــو معـــدوم و عـــدم پيوســـته
ســـاكن
بــه واجــب كَــي
رســد معــدومِ ممكــن
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٤٧٥ |
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اگــر جانــت شــود زيــن معنــي آگــاه
بگوئــــــي در زمــــــان
اســــــتغفراالله
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نـــدارد هـــيچ
جوهـــر عَـــرَض عَـــين
عَــرَض چــه ببُوَد كــه لا
يَبقَــي
زمانَــين
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حكيمـي كانـدر ايـن فـن كـرد تصنيف
بـه طول و عرض و عمقش كرد تعريف |
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هيولَــَي چيســت جــز معــدومِ مطلــق
كــه ميگــردد بــه او
صــورت محقَّــق
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چـو صـورت بـيهيولَـي در
قِـدم نيست
هيولــي نيــز بــي او جــز عــدم نيســت
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٤٨٠ |
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شــده اجســام عــالَم زيــن دو معــدوم
كـه جـز
معـدوم از ايشـان نيسـت معلوم
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ببـــين
ماهيـــتت را بـــي كـــم و بـــيش
نـه معـدوم و نه موجود است در خويش
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نظــر كــن در حقــيقت ســوي
امكــان
كــه او بــيهســتي آمــد عــين نقصــان
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وجـود انـدر كمال خويش ساري است
تَعَــــيُّن
نهــــا امــــورِ
اعتــــباري اســــت َ
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امــــور اعتــــباري
نيســــت موجــــود
عـدد بسـيار
و يـك چيـز اسـت معـدود
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٤٨٥ |
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جهــان را نيســت هســتي جــز مجــازي
سراســر كــارِ او لهــو اســت و بــازي
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چــو نــور نفــسِ گــويا بــر تــن آيــد
يكــي جســم
لطــيف و روشــن آيــد
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شــود طفــل و جــوان و
كَهــل و كمپيــر
بـــيابد علـــم و رأي و فهـــم و تدبيـــر
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رســد آنگــه اجــل از حضــرتِ پــاك
رود پاكــي بــه پاكــي خــاك وا خــاك
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همـــه
اجـــزاي عـــالَم چـــون نباتـــند
كـــه يـــك قطـــره
ز دريـــاي حياتـــند
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٤٩٠ |
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زمــان چــو بگــذرد بــر وي
شــود بــاز
همـــه انجـــامِ ايشـــان همچـــو آغـــاز
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رود هــر يــك از ايشــان ســوي مركــز
كــه نگــذارد طبــيعت خــوي مركــز
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چـو دريايي است
وحدت ليك پرخون
كــاز او خيــزد هــزاران
مــوجِ مجــنون
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نگــــر تــــا قطــــرة بــــاران ز دريــــا
چگــونه يافــت چــندين شــكل و اســما
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بخـــار و ابـــر و بـــاران و نـــم و گـــل
نـــــبات و
جانـــــور انســـــانِ كامـــــل
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٤٩٥ |
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همــه يــك قطــره
بــود آخــر در اول
كــاز او شــد ايــن همــه
اشــيا مُمـَـثَّل
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جهـان از عقـل و نفـس و چرخ و اَ جرام
چـو آن يـك قطـره دان زآغـاز و انجام
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اجـل
چـون در رسـد در چـرخ و انجـم
شـــود
هســـتي همـــه در نيســـتي گـــم
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چـو موجـي بـر زند گردد جهان طَ مس
يقــين گــردد «كَــاَن لَــم
تَغــنَ بِــالأمس»
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خــيال از پــيش برخيــزد بــه يــك بــار
نمانــــد غيــــرِ حــــق در دار و ديَــَــار
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٥٠٠ |
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تــو را قُربَــي شــود
آن لحظــه حاصــل
شـوي تـو بـي «تـو»ئـي با دوست واصل
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وصــال ايــن جايگــه رفــعِ خــيال اســت
چـو غيـر از پـيش برخيـزد
وصـال است
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مگـو
ممكـن ز حـدِّ خـويش بگذشـت
نـه او واجـب شـد و نه واجب او گشت
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هــرآن كــاو در معانــي گشــت فايــق
نگـــويد كـــاين
بـــوَد قلـــب حقايـــق
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هــزاران نَشــاَه داري خــواجه در پــيش
بـــُرو آمـــد شـــدِ خـــود را
بيـــنديش
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٥٠٥ |
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ز بحــث جــزو و كــل
نَشَــآتِ انســان
بگــويم يــك بــه يــك پــيدا و پــنهان
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بخــــاري مــــرتفع گــــردد ز دريــــا
بــه امــر
حــق فــرو بــارد بــه صــحرا
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شــــعاع آفــــتاب از چــــرخ چــــارم
بـــر او افـــتد شـــود
تـــركيب بـــا هـــم
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كـــند گرمـــي دگـــر ره
عـــزم بـــالا
در آويـــــزد بـــــه او آن آب دريـــــا
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چـو بـا ايشـان شـود خـاك و هـوا ضَـم
بــــرون آيــــد نــــباتِ ســــبز و خــــرم
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٥١٠ |
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غــــذاي
جانــــور گــــردد ز تــــبديل
خـــورد انســـان و
يابـــد بـــاز تحلـــيل
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شــود يــك نطفــه و گــردد در
اطــوار
وزاو انســـان شـــود پـــيدا دگـــر
بـــار |
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